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Lord Hanuman Worship for Male Child

पुत्र प्राप्ति के लिए हनुमान जी की साधना

पांचवां घर कुंडली में संतान का कारक होता है | ऐसा माना जाता है कि पचम भाव पर स्त्री ग्रहों का अधिक प्रभाव होने से कन्या सन्तान अधिक होती हैं | परन्तु मैंने बहुत सी कुंडलियाँ देखीं हैं जिनमे केवल पुत्र कारक ग्रहों का प्रभाव पंचम भाव और गुरु पर था फिर भीपुत्र  संतान के लिए लोग तरसते रहे | इस सन्दर्भ में उन सभी लोगों की कुंडलियों का गहराई से अध्ययन अन्वेषण किया गया जो पुत्र सुख से वंचित रहे थे |

कहीं पति की कुंडली में कमी दिखाई देती तो कभी पत्नी की कुंडली में | फिर जो बात मेरी समझ में आई वह ये है कि जन्म मरण के विषय में भविष्यवाणी करना और बात है परन्तु

कुदरत हर कदम पर हमारे नियमों को ठुकरा सकती है | हम कितना भी गणित लगायें पर जन्म और मृत्यु पर भविष्यवाणी करने के लिए गणना कीं नहीं सिद्धि की

आवश्यकता होती है |

 

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पुत्र सन्तान न होने के पीछे कारण चाहे जो भी हों जिस उपाय की चर्चा मैं यहाँ कर रहा हूँ वह आश्चर्यजनक रूप से काम करता है और इस उपाय को कई लोगों ने आजमाया है | नियम से करने पर इस उपाय से पुत्र सन्तान अवश्य होती है |

परन्तु हनुमान जी की साधना आसान नहीं है | जब भी हनुमान जी की पूजा का संकल्प लिया जाता है तो सर्व प्रथम शर्त होती है ब्रह्मचर्य | यदि आप निश्चित दिनों के लिए अपने मन पर संयम रख सकते हैं तो यह साधना आप कर सकते हैं | इस साधना के लिए मूंगे की माला का प्रयोग करें तो अच्छा है नहीं तो रुद्राक्ष की माला भी चलेगी | शुक्ल पक्ष के मंगलवार से प्रारम्भ करके हनुमान चालीसा का एक सौ आठ बार जप रोजाना करें |

जप रात्री में किया जाए तो उत्तम है | स्नान ध्यान और शुद्धि का ध्यान रखें | स्त्री स्पर्श,मांसाहार और मदिरा का सेवन साधनाकाल के दौरान और साधना के बाद साठ दिनों तक वर्जित है |

लाल रंग का आसन लगाकर हनुमान जी के समक्ष बैठ कर धुप दीप आदि से पूजनोपरांत प शुरू करें | चालीस दिन के बाद आप के अन्दर इतनी शक्ति आ जायेगी कि हर चीज तुच्छ लगने लगेगी |

साहस उत्साह और स्फूर्ति का एहसास तीसरे दिन से होने लगेगा | चालीस दिन बाद दुष्कर कार्य भी आप आसानी से कर पायेंगे | कुछ साधकों को हनुमान जी के स्वप्न में दर्शन भी होते हैं |

एक बात का ध्यान रखें कि हनुमान जी की पूजा से पहले श्रीराम जी का ध्यान अवश्य कर लें |

इस साधना के फलस्वरूप आपके वीर्य में पुत्र उत्पन्न करने की क्षमता का विकास कई गुना हो जाएगा | स्तम्भन शक्ति भी पहले से कई गुना बढ़ जायेगी | आवश्यकता है चालीस दिनों के परहेज की,  दृढ़ संकल्प और इच्छा शक्ति की | किसी भी तरह की दुविधा और संकोच मन में हो तो ईमेल द्वारा सम्पर्क करें |

जय श्री राम |

अशोक प्रजापति ||

 

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