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जन्म कुंडली मिलान इतना सरल नहीं है जितना समझा जाता है। जन्म कुंडली मिलान के नाम पर 36 में से कम से कम 18 गुणों के आ जाने पर विवाह करा दिया जाता है और बाकी सब आप का रिस्क पर होता है।

हमने सैकड़ों सुखी लोगों की कुंडलियां देखी है। उन पर रिसर्च की है जिसके चलते हमें यह पता चला है कि केवल गुण मिलान कर देने मात्र से जन्म कुंडली मिलान नहीं हो जाता। बल्कि जन्म कुंडली में एक सुदर्शन चक्र नाम से कुंडली होती है। जिसमें सूर्य, चंद्र और लगन तीनों को लिया जाता है। अगर यह तीनों मिल जाएं तो बड़े से बड़े दोष से भी आपको घबराने की आवश्यकता नहीं है। ज्यादा नियमों के चक्कर में ना पड़ें तो अच्छा है। क्योंकि जितने ज्यादा नियम आप कुंडली मिलान में लागू करेंगे जन्म कुंडली उतनी ही कम मिलेगी। और 100% में से केवल 10% लोग ही विवाह कर पाएंगे इससे अच्छा तो यह होगा कि कुंडली मिलान किया ही ना जाए।

जन्म कुंडली मिलान में हम निम्नलिखित बातों को गंभीरता से देखते हैं:-

नाडी और भकूट दोष

नाडी और भकूट दोष यदि आपके पाए जाते हैं। तो घबराने की बात नहीं है क्योंकि यह दोष होने के बावजूद शादी की जा सकती है। यदि आपकी कुंडली के लग्न राशि या नक्षत्र का स्वामी एक ही ग्रह हो।

मांगलिक दोष

मांगलिक दोष पर किताब लिखी जा सकती है। आप जितना इसके बारे में पड़ेंगे उतना कंफ्यूज होंगे। मोटी सी बात यह है कि मांगलिक दो प्रकार का होता है। प्रबल मांगलिक और आंशिक मांगलिक। यदि आप प्रबल मांगलिक है तो आपकी शादी आंशिक मांगलिक से नहीं होनी चाहिए। परंतु यदि आप आंशिक मांगलिक हैं तो आपकी शादी सामान्य व्यक्ति से भी हो सकती है। आपको आंशिक मांगलिक व्यक्ति देखने की आवश्यकता नहीं है। इस नियम को याद रखेंगे तो जो कुंडलियां कहीं मेल नहीं खा रही वह हमारे पास आकर मिल जाएंगी और शादी संभव हो जाएगी।

वैधवा या विधुर योग

जिससे आपकी शादी होने जा रही है उसकी आयु में कोई खतरा तो नहीं है। यह देखना हमारा काम है यदि कोई खतरा है। तो उसका हर संभव उपाय भी देखा जाता है जो बेहद महत्वपूर्ण है।

तलाक या सेपरेशन

सूर्य, बुध, राहु और कुंडली का द्वादशेश यह सब ग्रह लोगों को अलग करवाने का कार्य करते हैं। इन ग्रहों का जितना प्रभाव दांपत्य जीवन पर पड़ेगा। तलाक या अलगाव के योग उतने ही बढ़ जाएंगे। ऐसी स्थिति में देखा जाता है कि कहीं यह सब तलाक का रूप तो नहीं ले लेंगे। जिन लोगों की कुंडली में तलाक या दूसरी शादी का योग होता है उन्हें कुंभ विवाह की सलाह दी जाती है।

अधिकतम कुंडली मिलान

अधिकतर कुंडलियां जो कहीं मैच नहीं होती हमारे पास आकर 100% में से 80% कुंडलियां मिल जाती है। और अधिकतर मामले प्रेम विवाह के होते हैं। क्योंकि यदि ईश्वर ने आपको बुलाया है तो कुंडली ना मिलने का सवाल ही पैदा नहीं होता। आवश्यकता है हर छोटी से छोटी चीज को बारीकी से देखने की। क्योंकि ईश्वर की दृष्टि में कुछ भी बेमेल नहीं है। यदि संजोग हुआ है तभी लोग मिलते हैं। और इसे ईश्वर से अधिक और कोई नहीं समझता। हमें ईश्वर की उस भाषा को समझना है जो कहती है कि आपके मिलान में ईश्वर की इच्छा है।

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