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Horoscope Reading

भविष्य को जानने के लिए अनेक माध्यम है जिनमें सबसे अधिक प्रमाणिक और सटीक जन्म कुंडली है। जन्म कुंडली को पढ़ने के लिए ना केवल कुंडली के अनेक अंगों का ज्ञान होना आवश्यक है बल्कि ईश्वर ने हमें जो अंतर्ज्ञान दिया है। जो पूर्वाभास और अतींद्रिय ज्ञान की शक्ति दी है उसकी भी आवश्यकता पड़ती है।  प्राचीन समय में ऋषि मुनि तपस्या करके जो धर्म और पुण्य अर्जित करते थे।  वह श्राप देने आशीर्वाद देने या वरदान देने में खर्च होता था अर्थात यदि आपके पास पुण्य कर्म है तभी आपके मुंह से निकली बात सत्य सिद्ध हो सकती है।

जन्म कुंडली में जन्म लग्न तो महत्वपूर्ण है ही परंतु सूर्य और चंद्र लग्न भी बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। मान लीजिए लग्न में योग है 40 वर्ष की आयु में मृत्यु का तो वह सूर्य और चंद्र लग्न में देखने पर भी अगर पाया जाएगा तो 40 वर्ष से पहले ही मृत्यु हो जाएगी। और यदि सूर्य और चंद्र लग्न में वह योग नहीं होगा तो 40 वर्ष की आयु के पश्चात भी मृत्यु कब होगी वह अन्य ग्रहों पर निर्भर करेगा।  इसके पश्चात यदि आप नवमास नहीं देखेंगे तो किसी भी ग्रह के बारे में यह अनुमान नहीं लगा सकते की वास्तविक रुप में वह शुभ है या अशुभ।

लग्न में यदि कोई ग्रह नीच का है और नवमांश में वही ग्रह उच्च का हो तो उस ग्रह का फल कुछ ऐसा होगा कि ना तो वह नीच का रहेगा ना ही वह उच्च का रहेगा। वह बिल्कुल ही साधारण फल देने वाला ग्रह बन जाएगा। आजकल तो बस जन्म लग्न को देख लेते हैं उसके पश्चात बोलते चले जाते हैं विंशोत्तरी दशा नक्षत्रों पर आधारित है। और बड़ी ही हैरानी का विषय है कि लोग नक्षत्र के बारे में चर्चा ही नहीं करते यदि सूर्य चंद्रमा के नक्षत्र में हो और चंद्रमा सूर्य के नक्षत्र में तो इसे परिवर्तन योग जैसी स्थिति माना जा सकता है। और परिवर्तन योग के बारे में मैं पहले ही बता चुका हूं कि यह कितना प्रभावशाली होता है।

अब यदि हम विंशोत्तरी दशा को इतना सीरियसली लेते हैं तो क्यों नहीं हम ग्रहों के नक्षत्रों को उतना गंभीरता से लेते। यह दोनों ही नक्षत्रों पर आधारित हैं। ज्योतिष का एक और महत्वपूर्ण अंग है अष्टक वर्ग जिसमें यहां तक पता लगाया जा सकता है कि आपके भाई बहन कितने होंगे आप के कितने बच्चे होंगे या फिर किसी ग्रह के वास्तविक बल का पता लगाने के लिए अष्टक वर्ग को देखा जाता है। अब यदि षोडश वर्ग की बात की जाए तो कितने ऐसे लोग हैं जो षोडश वर्ग में पड़ी कुंडलियों को पढ़ना जानते हैं। जीवन के हर क्षेत्र के लिए एक कुंडली अलग से बनाई जाती है जो 16 वर्षों में रहती है। जैसे नौकरी के लिए द्रेष्काण। माता पिता के लिए द्वादशांश पतली के लिए नवमांश। यह सभी अंग महत्वपूर्ण होते हैं इनके बिना फलकथन करना ना केवल गलत होगा बल्कि जल्दबाजी भी। इतना सब कुछ पढ़ने के लिए पांच 10 मिनट काफी नहीं है।

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